House Rent Ke Sath Budget Kaise Banaye यह India में salaried लोगों के लिए सबसे common financial challenge है। जब salary का 30–40% हिस्सा rent में चला जाता है, तो बाकी expenses और savings manage करना मुश्किल हो जाता है। इस guide में आप practical तरीके से rent ke sath budget planning करना सीखेंगे।
House rent ke sath budget aaj ke Indian middle class ke liye ek badi challenge hai.
अक्सर हम सुनते हैं कि “बचत करनी चाहिए,” लेकिन जब सैलरी का 40% या 50% हिस्सा सिर्फ रहने के किराये (Rent) में चला जाए, तो सेविंग्स के लिए बजट बनाना नामुमकिन सा लगता है। एक तरफ बेहतर लाइफस्टाइल और ऑफिस के पास रहने की चाहत होती है, तो दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई और भविष्य की चिंता।
लेकिन सच्चाई यह है कि अगर आप Smart Budgeting और सही प्लानिंग के साथ चलें, तो रेंट पे (pay) करने के बावजूद आप फाइनेंशियल स्टेबिलिटी पा सकते हैं।
इस विस्तृत गाइड में, हम सिर्फ किताबी बातें नहीं करेंगे। हम प्रैक्टिकल भारतीय स्थितियों पर बात करेंगे कि High Rent के साथ बजट कैसे मैनेज करें। हम देखेंगे:
- सैलरी का कितना % रेंट होना चाहिए (आदर्श बनाम हकीकत)।
- मेट्रो और नॉन-मेट्रो शहरों का गणित।
- ₹30,000 और ₹50,000 की सैलरी पर रियल-लाइफ कैलकुलेशन।
अगर आप हर महीने के अंत में पैसे खत्म होने की टेंशन से थक चुके हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए गेम-चेंजर साबित होगा।
यह guide specifically rent-focused budgeting के लिए है। Complete budget planning guide के लिए Monthly Budget Kaise Banaye article देखें।
House Rent Ke Sath Budget Kaise Banaye – Rent Salary Ka Kitna % Hona Chahiye
जब हम पर्सनल फाइनेंस की किताबें पढ़ते हैं, तो वहाँ एक ‘Thumb Rule’ होता है। लेकिन क्या वह नियम आज के भारतीय रियल एस्टेट मार्केट में लागू होता है? आइये समझते हैं कि आपकी सैलरी का कितना हिस्सा रेंट में जाना सुरक्षित है और कब यह एक “Financial Trap” बन जाता है।
Housing affordability guideline देखें:
1. The Ideal Rule (आदर्श स्थिति): 25-30%
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के अनुसार, आपका मंथली रेंट आपकी Net Take-Home Salary के 30% से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

उदाहरण के लिए, अगर आपकी सैलरी ₹50,000 है, तो आपका रेंट ₹15,000 के अंदर होना चाहिए। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि बाकी का 70% पैसा आपके राशन, बिल, लाइफस्टाइल और सबसे ज़रूरी—Investments (SIPs/Mutual Funds) के लिए बचे।
2. The Indian Reality (भारतीय वास्तविकता): 35-45%
हालाँकि, मेट्रो शहरों की हकीकत कुछ और है। मुंबई के अंधेरी या बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड जैसे इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए 30% वाला नियम फॉलो करना मुश्किल हो जाता है।
भारत में आजकल कई यंग प्रोफेशनल्स अपनी सैलरी का 35% से 45% तक रेंट में खर्च कर रहे हैं ताकि कम्यूट टाइम (आने-जाने का समय) बचे और स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग बना रहे।
अगर आप 35-40% की रेंज में हैं, तो आपको अपने ‘Wants’ (शौक) पर सख्ती से कटौती करनी पड़ेगी, तभी आपका बजट बैलेंस होगा।
3. The Danger Zone (खतरे की घंटी): 40%+
अगर आपका रेंट आपकी सैलरी का 40% से ज्यादा है, तो आप एक ‘Financial Red Zone’ में हैं।
इसका नुकसान यह होता है:
- Emergency Fund नहीं बन पाता।
- छोटी सी भी मेडिकल इमरजेंसी आने पर आपको क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन लेना पड़ता है।
- फ्यूचर गोल्स (जैसे घर खरीदना या रिटायरमेंट) के लिए SIPs शुरू नहीं हो पातीं।
नीचे दी गई टेबल से समझें कि आप कहाँ खड़े हैं:
| Monthly Salary (In Hand) | Ideal Rent (30%) | Realistic Rent (Metro) | Danger Zone (>45%) |
| ₹25,000 | ₹7,500 | ₹10,000 | ₹11,500+ |
| ₹40,000 | ₹12,000 | ₹15,000 – ₹17,000 | ₹18,000+ |
| ₹60,000 | ₹18,000 | ₹22,000 – ₹25,000 | ₹27,000+ |
| ₹1,00,000 | ₹30,000 | ₹35,000 – ₹40,000 | ₹45,000+ |
Pro Tip: अगर आप ‘Danger Zone’ में हैं, तो आपको तुरंत या तो अपनी इनकम बढ़ानी होगी, या फिर लोकेशन बदलकर रेंट कम करना होगा। इसके अलावा कोई तीसरा रास्ता लंबे समय तक नहीं चल पाएगा।
Metro vs Non-Metro Rent Comparison: शहर बदलने से बजट पर असर
जब हम हाउस रेंट के साथ बजट बनाने की बात करते हैं, तो “Location” सबसे बड़ा फैक्टर होता है। ₹40,000 की सैलरी इंदौर (Non-Metro) में एक राजा जैसी लाइफस्टाइल दे सकती है, लेकिन वही सैलरी मुंबई (Metro) में शायद सिर्फ सर्वाइवल के लिए काफी हो।

भारत में रेंट का स्ट्रक्चर शहर के हिसाब से बहुत बदल जाता है। आइए इसे गहराई से समझते हैं।
Metro cities में House Rent Ke Sath Budget Kaise Banaye यह समझना और भी important हो जाता है।
1. Metro Cities (महानगर) की कहानी
मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली-NCR और हैदराबाद जैसे शहरों में रेंट आसमान छू रहे हैं। यहाँ आप सिर्फ चार दीवारों का किराया नहीं देते, बल्कि आप “Time” और “Opportunity” का किराया देते हैं।
- Mumbai: यहाँ ₹20,000 में एक अच्छा 1 BHK मिलना भी मुश्किल है (खासकर Western suburbs में)। लोग अक्सर शहर के बाहरी इलाकों (जैसे Thane, Navi Mumbai) में शिफ्ट होते हैं, लेकिन फिर उनका ट्रेवल खर्च (Transport Cost) बढ़ जाता है।
- Bengaluru: IT hubs (Whitefield, HSR Layout) के पास रेंट बहुत ज्यादा है। यहाँ सिक्योरिटी डिपॉजिट (Advance) भी अक्सर 5 से 10 महीने का मांगा जाता है, जो बजट को बिगाड़ देता है।
2. Non-Metro / Tier-2 Cities का सुकून
पुणे, जयपुर, इंदौर, या चंडीगढ़ जैसे शहरों में रेंट अभी भी कंट्रोल में है। यहाँ आपको कम दाम में बड़ी जगह और बेहतर लिविंग स्टैंडर्ड मिल सकता है। यहाँ ट्रांसपोर्टेशन सस्ता है और लाइफस्टाइल की लागत (Hidden costs) भी कम है।
नीचे दी गई टेबल में भारत के प्रमुख शहरों में औसत किराये (Average Rent) की तुलना देखें:
| City Category | City Example | Avg. Rent (1 BHK) | Avg. Rent (2 BHK) | Hidden Lifestyle Cost |
| Top Metro | Mumbai | ₹25,000 – ₹35,000 | ₹45,000+ | High (Travel + Dining) |
| IT Hub Metro | Bengaluru/Gurgaon | ₹15,000 – ₹22,000 | ₹28,000 – ₹35,000 | Very High (Deposit + Cab) |
| Growth Hub | Pune/Hyderabad | ₹12,000 – ₹18,000 | ₹20,000 – ₹28,000 | Moderate |
| Non-Metro | Jaipur/Indore | ₹7,000 – ₹10,000 | ₹12,000 – ₹16,000 | Low |
महत्वपूर्ण सीख:
सिर्फ कम रेंट देखकर शहर के बहुत दूर वाले इलाके में शिफ्ट होना समझदारी नहीं है।
हमेशा “Rent + Transport Cost” को मिलाकर ही फैसला लें।
House Rent Ke Sath Budget Balance Formula: गणित को कैसे सुलझाएं?
ज्यादातर लोग गलती यह करते हैं कि सैलरी आते ही पहले रेंट देते हैं, फिर खर्च करते हैं, और आखिर में जो बचता है उसे सेव करने की सोचते हैं। लेकिन हाई रेंट (High Rent) वाले बजट में आखिरी में कुछ नहीं बचता।
आपको अपना सोचने का तरीका (Mindset) बदलना होगा। इसके लिए हम एक सिंपल लेकिन पावरफुल फॉर्मूला अपनाएंगे।
The Golden Formula: Income – Savings = Expenses
(कमाई – बचत = खर्चे)

Rent Decide Karte Time Ye 3 Sawal Zaroor Poochhein
- क्या रेंट + ट्रैवल मिलाकर सैलरी का 40% cross कर रहा है?
- क्या 6 महीने का emergency fund है?
- क्या अगले 2 साल इस शहर में रहना पक्का है?
पुराना तरीका भूल जाएं (Income – Expenses = Savings). जब आपका रेंट ज्यादा हो, तो आपको सेविंग्स को भी एक “Bill” की तरह ट्रीट करना होगा जिसे चुकाना अनिवार्य है।
High Rent के लिए संशोधित बजट नियम (Modified 50-30-20 Rule)
पारंपरिक 50-30-20 नियम (50% Needs, 30% Wants, 20% Savings) हाई रेंट वाली स्थिति में फेल हो जाता है। भारतीय मिडिल क्लास के लिए यहाँ एक प्रैक्टिकल फॉर्मूला है:
- 50-55% (Fixed Needs): इसमें आपका Rent, बिजली बिल, राशन, और EMI शामिल हैं। कोशिश करें कि यह हिस्सा 55% से ऊपर न जाए। अगर रेंट ज्यादा है, तो दूसरे फिक्स्ड खर्चे कम करें।
- 20% (Future Security): यह हिस्सा Non-negotiable है। सैलरी आते ही 20% सीधे दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर करें या SIP कटने दें। इसमें आपकी इमरजेंसी फंड और रिटायरमेंट सेविंग शामिल है।
- 25-30% (Lifestyle & Wants): बाहर खाना, शॉपिंग, नेटफ्लिक्स, घूमना। अगर रेंट ज्यादा दे रहे हैं, तो आपको इसी हिस्से में कटौती करनी होगी।
सबसे पहले: Emergency Fund (आपातकालीन फंड)
किराये के घर में रहने वालों के लिए इमरजेंसी फंड सबसे ज्यादा जरूरी है। सोचिए, अगर जॉब छूट जाए तो होम लोन की EMI कुछ महीने रोकी जा सकती है (bank से बात करके), लेकिन मकान मालिक रेंट के लिए नहीं रुकेगा।
- Target: कम से कम 3 से 6 महीने के Rent + Ration के बराबर पैसा बैंक में अलग रखें।
- इसे हाथ न लगाएं जब तक कि कोई बड़ी मुसीबत न हो।
₹30,000 Salary Me Rent Budget Example: टाइट बजट की हकीकत

₹30,000 की इन-हैंड सैलरी के साथ मेट्रो सिटी में सरवाइव करना और साथ में सेविंग करना एक चुनौती है, लेकिन नामुमकिन नहीं। इस लेवल पर आपको ‘Sharing’ (साझा) में रहने की आदत डालनी होगी। अगर आप इस सैलरी पर पूरा फ्लैट अकेले लेने की सोच रहे हैं, तो आप गलती कर रहे हैं।
आइए देखते हैं कि Smart Allocation कैसे काम करता है:
- Salary (In Hand): ₹30,000
- Recommended Rent: ₹8,000 – ₹9,000 (Max)
- Living Style: PG / Shared Flat / Non-Metro Independent House
The Monthly Breakdown Table:
| खर्च की श्रेणी (Category) | राशि (Amount) | सुझाव (Tips) |
| Rent + Maintenance | ₹9,000 | (30%) अच्छा PG या 2BHK में शेयरिंग रूम लें। |
| Grocery & Food | ₹6,000 | टिफिन सर्विस या खुद कुकिंग करें। बाहर खाने से बचें। |
| Transport | ₹3,000 | Metro पास या बस का उपयोग करें। Ola/Uber कम करें। |
| Bills (Mobile/WiFi/Elec) | ₹1,500 | अनलिमिटेड डेटा प्लान और समझदारी से बिजली यूज़ करें। |
| SAVINGS (SIP/RD) | ₹5,000 | (16%) सैलरी आते ही सबसे पहले निवेश करें। |
| Lifestyle / Misc | ₹5,500 | वीकेंड आउटिंग, कपड़े या अचानक खर्चे के लिए। |
| Total | ₹30,000 | Balance: ₹0 |
कड़वी सच्चाई (Reality Check):
याद रखें, अभी जो ₹5,000 आप बचा रहे हैं, वही भविष्य में आपको बड़ा घर दिलाने की नींव है। इसलिए रेंट कम रखें और SIP जारी रखें।
₹50,000 Salary Me Rent Budget Example: “लाइफस्टाइल का जाल”

₹50,000 की सैलरी पर आते ही इंसान अक्सर एक गलती करता है—उसे लगता है कि वह अमीर हो गया है। इसे “Lifestyle Inflation” कहते हैं। हम रेंट ₹8,000 से सीधे ₹20,000 पर ले जाते हैं क्योंकि हमें “प्राइवेसी” चाहिए।
लेकिन समझदारी इसमें है कि सैलरी बढ़ने पर रेंट न बढ़ाया जाए, बल्कि निवेश (Investment) बढ़ाया जाए।
- Salary (In Hand): ₹50,000
- Recommended Rent: ₹12,000 – ₹15,000
- Living Style: Decent 1BHK (Pune/Noida) or Premium Sharing (Mumbai/Bangalore)
The Monthly Breakdown Table:
| खर्च की श्रेणी (Category) | राशि (Amount) | क्या बदलाव आया? |
| Rent + Maintenance | ₹15,000 | (30%) आप बेहतर लोकेशन या बड़ा रूम ले सकते हैं। |
| Household & Food | ₹10,000 | अब आप बेहतर ग्रोसरी और कभी-कभी बाहर खाना अफोर्ड कर सकते हैं। |
| Transport | ₹4,000 | कभी-कभार कैब की सुविधा ले सकते हैं। |
| Investments (Must Do) | ₹12,000 | (24%) यह सबसे जरूरी है। SIP राशि बढ़ाएं। |
| Emergency Fund Allocation | ₹3,000 | लिक्विड फंड या RD में डालें (सेफ्टी के लिए)। |
| Lifestyle / Fun | ₹6,000 | शॉपिंग, मूवीज, ओटीटी सब्सक्रिप्शन। |
| Total | ₹50,000 | Wealth Building Mode On |
सावधान रहें (Warning Insight):
₹30k vs ₹50k Rent Budget – Core Difference
₹30k:
• Survival focused
• Sharing needed
• Rent control priority
₹50k:
• Discipline focused
• Choice available
• Lifestyle control needed
इस लेवल पर “Rent Creep” से बचें। अगर आपको ₹15,000 में अच्छा घर मिल रहा है, तो सिर्फ दोस्तों को दिखाने के लिए ₹22,000 वाला ‘फेंसी सोसाइटी’ फ्लैट न लें। वो एक्स्ट्रा ₹7,000 अगर आप इंडेक्स फंड (Index Fund) में डालें, तो आप 5 साल में अपनी कार के लिए कैश जमा कर सकते हैं।
Key Takeaway:
₹30k वाले व्यक्ति के लिए बजट का मतलब ‘Survival’ है, लेकिन ₹50k वाले व्यक्ति के लिए बजट का मतलब ‘Discipline’ है। रेंट को अपनी सैलरी का 30% क्रॉस न करने दें, चाहे कुछ भी हो जाए।
अब आप clearly समझ चुके हैं कि House Rent Ke Sath Budget Kaise Banaye और financial balance कैसे maintain करें।
Rent Kam Karne Ke Smart Tips: पैसे बचाने के 5 तरीके
किराया एक फिक्स्ड खर्चा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे कम नहीं किया जा सकता। भारत में थोड़ी सी स्मार्टनेस और बातचीत (Negotiation) से आप साल के हजारों रुपये बचा सकते हैं। यहाँ 5 प्रैक्टिकल टिप्स दिए गए हैं:

House Rent Ke Sath Budget Kaise Banaye – Step-by-Step Practical Process
1. “Unfurnished” घर चुनें (Furniture is expensive)
पूरी तरह से फर्निश्ड (Furnished) फ्लैट्स का किराया हमेशा 20-30% ज्यादा होता है।
- Smart Move: आप बेसिक फर्नीचर सेकंड-हैंड प्लेटफॉर्म्स (जैसे OLX, Facebook Marketplace) से सस्ते में खरीद सकते हैं या NoBroker जैसे प्लेटफॉर्म से सीधे ओनर से डील कर सकते हैं।”
2. मेन रोड से थोड़ी दूरी (The 2km Rule)
मेट्रो स्टेशन या मेन रोड के बिल्कुल पास वाला घर हमेशा महंगा होगा।
- Smart Move: अगर आप मेन रोड से सिर्फ 1-2 किलोमीटर अंदर घर लेते हैं, तो रेंट में ₹2,000 से ₹4,000 तक का अंतर आ सकता है। यह दूरी ऑटो या पैदल (Walking) कवर की जा सकती है, लेकिन इससे आपकी सालाना बचत ₹36,000+ हो सकती है।
3. रिन्यूअल के समय नेगोशिएट करें
ज्यादातर किराएदार एग्रीमेंट रिन्यू करते समय रेंट बढ़ाने की बात को चुपचाप मान लेते हैं।
- Smart Move: अगर आप समय पर रेंट देते हैं और घर साफ़ रखते हैं, तो मकान मालिक आपको खोना नहीं चाहेगा। उनसे बात करें: “मार्केट रेट चेक कीजिए, मैं टाइम पर पेमेंट करता हूँ, प्लीज इस साल किराया न बढ़ाएं।” अक्सर यह काम कर जाता है।
4. ब्रोकरेज बचाएं (No Brokerage)
मुंबई या बैंगलोर में 1 महीने का किराया बतौर ब्रोकरेज (दलाली) देना आम बात है, जो एक बड़ा झटका है।
- Smart Move: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का सही इस्तेमाल करें और सीधे ओनर से बात करने की कोशिश करें।
5. सही रूममेट्स ढूँढें (Power of Sharing)
अकेले 1BHK का पूरा बोझ उठाने से बेहतर है 2BHK या 3BHK को शेयर करना।
- Smart Move: शेयरिंग में प्रति व्यक्ति रेंट, बिजली बिल, वाई-फाई और कुक (Cook) का खर्चा आधा हो जाता है। यह आपकी सेविंग्स को डबल कर सकता है।
India में rent expense budgeting सबसे critical financial planning factor है, especially metro cities में।
क्या आप अपना पूरा Monthly Budget बनाना चाहते हैं?
रेंट आपके बजट का सिर्फ एक हिस्सा है। अगर आप जानना चाहते हैं कि बाकी खर्चों (राशन, बिजली, शॉपिंग) को कैसे कंट्रोल करें और एक एक्सेल शीट में पूरा बजट कैसे बनाएं, तो हमारी विस्तृत गाइड पढ़ें। 👉 [Monthly Budget Kaise Banaye: Step-by-Step Guide पढ़ें]
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50,000 Salary Me Budget Planning
Frequently Asked Questions (FAQs)
यहाँ रेंट और बजट से जुड़े उन सवालों के जवाब हैं जो लोग अक्सर Google और Quora पर पूछते हैं:
Q1 : क्या HRA (House Rent Allowance) का फायदा टैक्स में मिलता है? Answer: जी हाँ, अगर आप वेतनभोगी (Salaried) हैं और रेंट पे करते हैं, तो आप Section 10(13A) के तहत टैक्स छूट क्लेम कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपने एम्प्लॉयर को रेंट रिसीप्ट (Rent Receipts) जमा करनी होंगी। ₹1 लाख सालाना से ज्यादा रेंट होने पर लैंडलॉर्ड का PAN भी जरूरी है।
Q2 : सिक्योरिटी डिपॉजिट (Security Deposit) कितना देना सही है? Answer: यह शहर पर निर्भर करता है। दिल्ली/नोएडा में यह 1-2 महीने का होता है, जबकि बेंगलुरु/मुंबई में यह 6-10 महीने तक हो सकता है। हमेशा एग्रीमेंट में साफ लिखवाएं कि घर छोड़ते समय डिपॉजिट वापस मिलने की शर्तें क्या हैं, ताकि बाद में विवाद न हो।
Q3 : क्या मुझे घर खरीदने के लिए EMI देनी चाहिए या रेंट पर रहना चाहिए? Answer: यह एक बड़ा फैसला है। अगर आपकी EMI आपके मौजूदा रेंट से 30-40% ही ज्यादा है और आप उस शहर में अगले 10+ साल रहने वाले हैं, तो घर लेना सही हो सकता है। लेकिन अगर EMI रेंट से 3 गुना ज्यादा है, तो फिलहाल रेंट पर रहना और बाकी पैसा इन्वेस्ट करना (SIP) आर्थिक रूप से बेहतर है।
निष्कर्ष और एक्शन स्टेप्स: अब आगे क्या करें?

किराये (Rent) और बजट का रिश्ता खट्टे-मीठे जैसा होता है। हम सभी एक अच्छा घर चाहते हैं, लेकिन कोई भी अपनी मेहनत की कमाई का आधा हिस्सा मकान मालिक को नहीं देना चाहता।
इस पूरे आर्टिकल का सार (Summary) यही है: आपकी सैलरी कितनी है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आप उसे मैनेज कैसे करते हैं।
चाहे आप ₹30,000 कमा रहे हों या ₹1 लाख, अगर आपका रेंट आपकी कमाई के 30-35% के दायरे में है और आप अनुशासित (Disciplined) हैं, तो आप एक खुशहाल और तनाव-मुक्त जीवन जी सकते हैं। याद रखें, घर सिर्फ चार दीवारों से नहीं, बल्कि आपके मानसिक सुकून (Peace of Mind) से बनता है। अगर महंगा घर आपकी नींद उड़ा रहा है, तो वह घर रहने लायक नहीं है।
आज ही ये 3 कदम उठाएं (Action Steps):
सिर्फ पढ़कर न छोड़ें, अभी अपना कैलकुलेटर उठाएं और ये चेक करें:
- अपना Rent % निकालें: अपनी Net Salary को Total Rent से भाग दें। (Formula: Rent ÷ Salary × 100). अगर यह 40% से ऊपर है, तो आपको अगले 3 महीनों में या तो घर बदलने का प्लान बनाना चाहिए या अपनी इनकम बढ़ाने का रास्ता खोजना होगा।
- ‘Pay Yourself First’ नियम लागू करें: अगले महीने रेंट देने से पहले, कम से कम ₹1,000 या ₹2,000 की SIP या RD शुरू करें। मकान मालिक से पहले अपने भविष्य को पैसा दें।
- Hidden Costs को पहचानें: क्या आप रेंट के अलावा मेंटेनेंस, ब्रोकरेज या लंबी दूरी के कारण ट्रेवल पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं? इन “छिपे हुए खर्चों” को अपने बजट डायरी में नोट करें।
Financial Freedom की शुरुआत एक सही बजट से होती है। क्या आप अपने पैसे का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में लेने के लिए तैयार हैं?
👉 अगला कदम: अगर आपको यह आर्टिकल मददगार लगा, तो हमारे [Best Investment Apps in India] वाले आर्टिकल को पढ़ें और अपनी सेविंग्स को काम पर लगाएं।
Next Step:
Complete monthly budget structure सीखने के लिए Monthly Budget Kaise Banaye guide जरूर पढ़ें।
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