
अमित हर साल HR का ईमेल देखकर कन्फ्यूज़ हो जाता है — “Old Regime या New Regime चुनें?” पिछले साल उसने बिना सोचे New Regime चुन लिया, और बाद में पता चला कि उसके PPF, इंश्योरेंस, और होम लोन के डिडक्शन की वजह से Old Regime में उसका ₹18,000 कम टैक्स बनता।
ये कन्फ्यूजन हर साल लाखों टैक्सपेयर्स के साथ होता है। आइए दोनों regime को साफ-साफ समझें, और एक तरीका सीखें जिससे आप खुद अपना सही फैसला ले सकें।
Old Tax Regime vs New Tax Regime: सबसे ज़रूरी 6 अंतर
| पॉइंट | Old Regime | New Regime |
|---|---|---|
| डिफॉल्ट | नहीं (खुद चुनना पड़ता है) | हां (अगर कुछ नहीं चुना तो ये अपने-आप लागू) |
| टैक्स-फ्री सीमा | ₹2.5 लाख | ₹4 लाख |
| 87A रिबेट सीमा | ₹5 लाख तक टैक्स ज़ीरो | ₹12 लाख तक टैक्स ज़ीरो |
| डिडक्शन/छूट | 80C, 80D, HRA, होम लोन इंटरेस्ट, सब मिलते हैं | बहुत सीमित (स्टैंडर्ड डिडक्शन + employer NPS contribution) |
| टैक्स रेट | ऊंचे स्लैब रेट | कम स्लैब रेट |
| किसके लिए बेहतर | ज़्यादा investments/deductions वालों के लिए | कम deductions, सीधा हिसाब चाहने वालों के लिए |
New Tax Regime Slabs (FY 2025-26 & FY 2026-27): नया टैक्स रेट चार्ट
New Tax Regime Slabs (सीढ़ीनुमा इन्फोग्राफिक)
| इनकम रेंज | टैक्स रेट |
|---|---|
| ₹0 – ₹4 लाख | 0% (टैक्स-फ्री) |
| ₹4 – ₹8 लाख | 5% |
| ₹8 – ₹12 लाख | 10% |
| ₹12 – ₹16 लाख | 15% |
| ₹16 – ₹20 लाख | 20% |
| ₹20 – ₹24 लाख | 25% |
| ₹24 लाख से ऊपर | 30% |
Budget 2026 में कोई बदलाव नहीं हुआ — ये same slabs FY 2026-27 के लिए भी लागू हैं, सरकार ने स्थिरता बनाए रखने का फैसला किया।
Section 87A Rebate: New Regime में ₹12 लाख तक टैक्स ज़ीरो (Zero) कैसे है?
ये point सबसे ज़्यादा confusion पैदा करता है — “अगर ₹8-12 लाख पर 10% टैक्स लगता है, तो ₹12 लाख तक टैक्स-फ्री कैसे?”
जवाब है Section 87A रिबेट — अगर आपकी टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख या उससे कम है, सरकार आपको ₹60,000 तक का रिबेट (टैक्स में सीधी छूट) देती है, जो आपकी calculated tax को पूरी तरह ज़ीरो कर देता है।
उदाहरण: ₹12.75 लाख सैलरी पर टैक्स कैलकुलेशन (Tax Calculation)
- सैलरी: ₹12,75,000
- स्टैंडर्ड डिडक्शन: -₹75,000
- टैक्सेबल इनकम: ₹12,00,000
- Slabs के हिसाब से टैक्स: ₹60,000
- 87A रिबेट: -₹60,000
- फाइनल टैक्स: ₹0
ज़रूरी शर्त: ये रिबेट सिर्फ तब मिलता है जब टैक्सेबल इनकम एक रुपये भी ₹12 लाख से ऊपर न जाए। अगर आपकी टैक्सेबल इनकम ₹12,00,001 भी हो जाए, पूरा रिबेट खत्म हो जाता है और आपको स्लैब के हिसाब से पूरा टैक्स देना पड़ता है (हालांकि marginal relief का प्रावधान भी है, जो इस झटके को थोड़ा कम करता है)।
Old Tax Regime Slabs: पुराने टैक्स रेट्स और स्लैब
| इनकम रेंज | टैक्स रेट |
|---|---|
| ₹0 – ₹2.5 लाख | 0% |
| ₹2.5 – ₹5 लाख | 5% |
| ₹5 – ₹10 लाख | 20% |
| ₹10 लाख से ऊपर | 30% |
Old Regime में 87A रिबेट सिर्फ ₹5 लाख तक की टैक्सेबल इनकम पर मिलता है (अधिकतम ₹12,500 तक) — New Regime के ₹12 लाख वाले रिबेट से बहुत कम।
पर Old Regime का असली फायदा स्लैब में नहीं, deductions में है — आइए वो देखें।
Old Regime Deductions: 80C, 80D, HRA और होम लोन (Home Loan) का फायदा
- Section 80C — ₹1.5 लाख तक (PPF, ELSS, EPF, इंश्योरेंस, आदि) — पूरी लिस्ट हमारे 80C article में
- Section 80D — हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम, ₹25,000 (+₹50,000 सीनियर सिटीज़न पेरेंट्स के लिए)
- HRA (House Rent Allowance) — किराए पर रहने वालों के लिए, सैलरी स्ट्रक्चर और शहर के हिसाब से बड़ी छूट
- Section 24(b) — होम लोन इंटरेस्ट, ₹2 लाख तक
- Section 80CCD(1B) — NPS में अतिरिक्त ₹50,000
- स्टैंडर्ड डिडक्शन — ₹75,000 (दोनों regime में मिलता है, सैलरीड/पेंशनर्स के लिए)
New Regime में सिर्फ ये मिलते हैं: स्टैंडर्ड डिडक्शन (₹75,000) और employer का NPS contribution (Section 80CCD(2)) — बाकी सब (80C, 80D, HRA, होम लोन इंटरेस्ट) नहीं मिलते।
Income Tax Calculator: Old vs New Regime में क्या चुनें? (Breakeven समझें)
सामान्य नियम (rough estimate, सटीक नहीं):
| आपकी सालाना सैलरी | कुल deductions इतने हों तो Old Regime बेहतर | New Regime बेहतर अगर deductions कम हों |
|---|---|---|
| ₹10-15 लाख | ₹2.5 लाख से ज़्यादा | ₹2.5 लाख से कम |
| ₹15-20 लाख | ₹3.5-4 लाख से ज़्यादा | ₹3.5-4 लाख से कम |
| ₹20 लाख+ | ₹4.25 लाख से ज़्यादा | ₹4.25 लाख से कम |
मतलब: जिनके पास होम लोन भी है, और 80C भी पूरा भरते हैं, और HRA भी क्लेम करते हैं — उनके लिए अक्सर Old Regime बेहतर निकलता है। जिनके पास ये बड़े deductions नहीं (किराए पर नहीं रहते, होम लोन नहीं, ज़्यादा investments नहीं) — उनके लिए New Regime का सीधा, कम रेट वाला स्ट्रक्चर बेहतर रहता है।
₹15 लाख सैलरी पर Old vs New Regime का टैक्स कितना बनेगा?
New Tax Regime में कैलकुलेशन
- सैलरी: ₹15,00,000
- स्टैंडर्ड डिडक्शन: -₹75,000
- टैक्सेबल इनकम: ₹14,25,000
- टैक्स (4% cess सहित): करीब ₹1,01,400
- (87A रिबेट नहीं मिलेगा, क्योंकि ₹12 लाख से ज़्यादा है)
Old Tax Regime में कैलकुलेशन (₹3.5 लाख डिडक्शन के साथ)
- सैलरी: ₹15,00,000
- स्टैंडर्ड डिडक्शन: -₹50,000 (Old Regime में ये ₹50,000 है, New में ₹75,000)
- अन्य डिडक्शन: -₹3,50,000
- टैक्सेबल इनकम: ₹11,00,000
- टैक्स (4% cess सहित): करीब ₹1,48,200
इस उदाहरण में New Regime बेहतर निकला (₹1,01,400 vs ₹1,48,200) — भले ही ₹3.5 लाख का बड़ा deduction हो, क्योंकि New Regime की स्लैब रेट्स इतनी कम हैं कि वो फर्क को कवर कर लेती हैं। यही वजह है कि सिर्फ अंदाज़े से फैसला नहीं लेना चाहिए — हर केस अलग है, हमेशा calculate करें।
Tax Regime बदलने के नियम: क्या हर साल ऑप्शन (Option) बदल सकते हैं?
- सैलरीड individuals (बिना बिज़नेस इनकम) — हर साल, ITR फाइल करते वक्त, अपनी मर्ज़ी से regime चुन सकते हैं। कोई lock-in नहीं।
- बिज़नेस/प्रोफेशन इनकम वालों के लिए — Old Regime में जाने के लिए Form 10-IEA भरना पड़ता है, और New Regime में वापस आने की सुविधा सिर्फ एक बार जीवन में मिलती है।
निष्कर्ष (Conclusion): बिना कैलकुलेट किए टैक्स रेजीम न चुनें
ज़रूरी: अगर आपको Old Regime चुननी है, अपने employer को साल की शुरुआत में बता दें (Form 12BB के ज़रिए) ताकि TDS सही तरीके से कटे — नहीं तो साल के अंत में रिफंड के लिए इंतज़ार करना पड़ेगा।
अमित जैसे लाखों टैक्सपेयर्स की गलती यही है — बिना calculate किए अंदाज़े से regime चुनना। सही तरीका है: साल की शुरुआत में अपनी अनुमानित सैलरी और deductions के साथ दोनों regime का टैक्स निकालें, और जो कम आए वो चुनें। हर साल ये exercise दोहराएं, क्योंकि आपकी सैलरी या deductions बदलने पर सही choice भी बदल सकती है।
यह आर्टिकल सिर्फ शैक्षणिक जानकारी के लिए है, टैक्स सलाह नहीं। टैक्स कानून बदलते रहते हैं — सटीक कैलकुलेशन के लिए Income Tax Department के आधिकारिक कैलकुलेटर (incometax.gov.in) का इस्तेमाल करें या किसी certified टैक्स सलाहकार से सलाह लें।
Old vs New Tax Regime FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
1. क्या New Tax Regime अब डिफॉल्ट है?
हां, FY 2023-24 से New Tax Regime डिफॉल्ट है। अगर आप कुछ नहीं चुनते, अपने-आप New Regime लागू हो जाएगा। Old Regime चुनने के लिए active रूप से option exercise करना पड़ता है।
2. New Regime में ₹12 लाख तक टैक्स-फ्री कैसे है?
Section 87A रिबेट की वजह से — अगर टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख या उससे कम है, ₹60,000 तक का रिबेट मिलता है जो calculated tax को ज़ीरो कर देता है। ये सिर्फ slab की वजह से नहीं, रिबेट की वजह से है।
3. क्या Old Regime में भी standard deduction मिलता है?
हां, Old Regime में ₹50,000 का standard deduction मिलता है (New Regime में ये ₹75,000 है)।
4. हर साल regime बदल सकते हैं क्या?
सैलरीड individuals (बिना business income) हर साल अपनी मर्ज़ी से regime बदल सकते हैं, कोई पाबंदी नहीं। Business income वालों के लिए नियम अलग और सख्त हैं।
5. कौन सी regime ज़्यादा फायदेमंद है?
ये पूरी तरह आपकी सैलरी और deductions पर निर्भर करता है। बड़े deductions (होम लोन, HRA, भारी 80C investments) वालों के लिए अक्सर Old Regime बेहतर होती है, कम deductions वालों के लिए New Regime। हमेशा दोनों calculate करके compare करें।
6. क्या FY 2026-27 में tax slabs बदले हैं?
नहीं, Budget 2026 में सरकार ने दोनों regime के slabs में कोई बदलाव नहीं किया — FY 2025-26 वाले same rates जारी हैं।
संबंधित आर्टिकल पढ़ें:
- 80C डिडक्शन लिस्ट FY 2025-26 [internal link]
- NPS Tier 1 vs Tier 2 [internal link]
- PPF इंटरेस्ट रेट हिस्ट्री [internal link]